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वाल्मीकि रामायण 12.36

अहमुत्सादयिष्यामि शत्रूम्स्तव निशाचर ।
यदि शक्रविवस्वन्तौ यदि पावकमारुतौ ॥६-१२-३६॥

पूरा अध्याय