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वाल्मीकि रामायण 12.34

त्वयेदम् महादारभम् कार्य मप्रतिचिन्तितम् ।
दिष्ट्या त्वाम् नावधीद्रामो विषमिश्रमिवामृतम् ॥६-१२-३४॥

पूरा अध्याय