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वाल्मीकि रामायण 12.20

श्रान्तोऽहम् सततम् कामाद्यातो हय इवाध्वनि ।
कथम् सागरमक्षोभ्यम् तरिष्यन्ति वनौकसः ॥६-१२-२०॥

पूरा अध्याय