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वाल्मीकि रामायण 119.33

ददृशुस्तां त्रयो लोका देवगन्धर्वदानवाः ।
शप्तां पतन्तीं निरये त्रिदिवाद्देवतामिव ।। ६.११९.३३ ।।

पूरा अध्याय