Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 118.4

अद्य मे पौरुषं दृष्टमद्य मे सफलः श्रमः ।
अद्य तीर्णप्रतिज्ञत्वात् प्रभवामीह चात्मनः ।। ६.११८.४ ।।

पूरा अध्याय