ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 117117.7वाल्मीकि रामायण 117.7दिव्याङ्गरागां वैदेहीं दिव्याभरणभूषिताम् । इह सीतां शिरस्स्नातामुपस्थापय मा चिरम् ।। ६.११७.७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय