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वाल्मीकि रामायण 116.48

एवमुक्ता हनुमता वैदेही जनकात्मजा ।
अब्रवीद्द्रष्टुमिच्छामि भर्तारं वानरोत्तम ।। ६.११६.४९ ।।

पूरा अध्याय