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वाल्मीकि रामायण 113.26

विलेपुरेवं दीनास्ता राक्षसाधिपयोषितः ।
कुरर्य इव दुःखार्ता बाष्पपर्याकुलेक्षणाः ।। ६.११३.२६ ।।

पूरा अध्याय