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वाल्मीकि रामायण 111.21

गतासुर्भीमवेगस्तु नैर्ऋतेन्द्रो महाद्युतिः ।
पपात स्यन्दनाद्भूमौ वृत्रो वज्रहतो यथा ।। ६.१११.२२ ।।

पूरा अध्याय