ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 111111.16वाल्मीकि रामायण 111.16स वज्र इव दुर्धर्षो वज्रिबाहुविसर्जितः । कृतान्त इव चावार्यो न्यपतद्रावणोरसि ।। ६.१११.१७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय