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वाल्मीकि रामायण 110.32

मारीचो निहतो यैस्तु खरो यैस्तु सदूषणः ।
क्रौञ्चावने विराधस्तु कबन्धो दण्डकावने ।। ६.११०.३२ ।।

पूरा अध्याय