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वाल्मीकि रामायण 110.13

तया धर्षणया क्रुद्धो मातलेर्न तथा ऽ ऽत्मनः ।
चकार शरजालेन राघवो विमुखं रिपुम् ।। ६.११०.१३ ।।

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