Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 109.29

प्रयुध्यमानौ समरे महाबलौ शितैः शरै रावणलक्ष्मणाग्रजौ ।
ध्वजावपातेन स राक्षसाधिपो भृशं प्रचुक्रोध तदा रघूत्तमे ।। ६.१०९.२९ ।।

पूरा अध्याय