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वाल्मीकि रामायण 109.12

जगाम स महीं छित्त्वा दशग्रीवध्वजं शरः ।
स निकृत्तो ऽपतद्भूमौ रावणस्य रथध्वजः ।। ६.१०९.१२ ।।

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