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वाल्मीकि रामायण 108.22

सन्ध्यया चावृता लङ्का जपापुष्पनिकाशया ।
दृश्यते सम्प्रदीप्तेव दिवसे ऽपि वसुन्धरा ।। ६.१०८.२३ ।।

पूरा अध्याय