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वाल्मीकि रामायण 107.2

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।
उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवानृषिः ।। ६.१०७.२ ।।

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