ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 106106.3वाल्मीकि रामायण 106.3विमुक्तमिव मायाभिरस्त्रैरिव बहिष्कृतम् । मामवज्ञाय दुर्बुद्धे स्वया बुद्ध्या विचेष्टसे ।। ६.१०६.३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय