ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 105105.13वाल्मीकि रामायण 105.13स्त्रीषु शूर विनाथासु परदाराभिमर्शक । कृत्वा कापुरुषं कर्म शूरो ऽहमिति मन्यसे ।। ६.१०५.१३ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय