ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 104104.28वाल्मीकि रामायण 104.28सा क्षिप्ता राक्षसेन्द्रस्य तस्मिन् शूले पपात ह । भिन्नः शक्त्या महान् शूलो निपपात हतद्युतिः ।। ६.१०४.२८ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय