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वाल्मीकि रामायण 103.2

अथान्यं रथमारुह्य रावणो राक्षसाधिपः ।
अभ्यद्रवत काकुत्स्थं स्वर्भानुरिव भास्करम् ।। ६.१०३.२ ।।

पूरा अध्याय