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वाल्मीकि रामायण 100.39

ते भित्त्वा बाणरूपाणि पञ्चशीर्षा इवोरगाः।
श्वसन्तो विविशुर्भूमिं रावणप्रतिकूलिताः ।। ६.१००.३९ ।।

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