Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 100.35

रौद्रचापप्रयुक्तां तां नीलोत्पलदलप्रभाम्।
शिरसा धारयन् रामो न व्यथां प्रत्यपद्यत ।। ६.१००.३५ ।।

पूरा अध्याय