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वाल्मीकि रामायण 100.33

उभौ हि येन व्रजतस्तेन तेन शरोर्मयः।
ऊर्मयो वायुना विद्धा जग्मुः सागरयोरिव ।। ६.१००.३३ ।।

पूरा अध्याय