ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 100100.27वाल्मीकि रामायण 100.27तयोर्भूतानि वित्रेसुर्युगपत् सम्प्रयुध्यतोः। रौद्रयोः सायकमुचोर्यमान्तकनिकाशयोः ।। ६.१००.२७ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय