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वाल्मीकि रामायण 100.12

लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा विष्णुना वासवं यथा।
आलिखन्तमिवाकाशमवष्टभ्य महद्धनुः।पद्मपत्रविशालाक्षं दीर्घबाहुमरिन्दमम् ।। ६.१००.१२ ।।

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