ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 99.7वाल्मीकि रामायण 9.7तन् नक्र मकर आकीर्णम् तिमिम्गिल झष आकुलम् । वायु वेग समाधूतम् पन्नगैर् इव सागरम् ॥५-९-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय