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वाल्मीकि रामायण 9.65

व्यतिवेष्टित सुस्कन्थम् अन्योन्य भ्रमर आकुलम् ।
आसीद् वनम् इव उद्धूतम् स्त्री वनम् रावणस्य तत् ॥५-९-६५॥

पूरा अध्याय