ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 99.62वाल्मीकि रामायण 9.62ऊरु पार्श्व कटी प्Rष्ठम् अन्योन्यस्य समाश्रिताः । परस्पर निविष्ट अन्ग्यो मद स्नेह वश अनुगाः ॥५-९-६२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय