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वाल्मीकि रामायण 9.47

मुखा हार व्Rताः च अन्याः काश्चित् प्रस्रस्त वाससः ।
व्याविद्ध रशना दामाः किशोर्य इव वाहिताः ॥५-९-४७॥

पूरा अध्याय