ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 99.45वाल्मीकि रामायण 9.45व्याव्Rत्त गुरु पीन स्रक् प्रकीर्ण वर भूषणाः । पान व्यायाम कालेषु निद्रा अपह्Rत चेतसः ॥५-९-४५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय