ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 99.36वाल्मीकि रामायण 9.36तत् प्रसुप्तम् विरुरुचे निह्शब्द अन्तर भूषणम् । निह्शब्द हम्स भ्रमरम् यथा पद्म वनम् महत् ॥५-९-३६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय