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वाल्मीकि रामायण 9.34

ततो अपश्यत् कुथा आसीनम् नाना वर्ण अम्बर स्रजम् ।
सहस्रम् वर नारीणाम् नाना वेष विभूषितम् ॥५-९-३४॥

पूरा अध्याय