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वाल्मीकि रामायण 9.2

अर्ध योजन विस्तीर्णम् आयतम् योजनम् हि तत् ।
भवनम् राक्षस इन्द्रस्य बहु प्रासाद सम्कुलम् ॥५-९-२॥

पूरा अध्याय