वाल्मीकि रामायण 7.16
ततः स ताम् कपिर् अभिपत्य पूजिताम् ।
चरन् पुरीम् दश मुख बाहु पालिताम् ।अदृश्य ताम् जनक सुताम् सुपूजिताम् ।सुदुह्खिताम् पति गुण वेग निर्जिताम् ॥५-७-१६॥
ततः स ताम् कपिर् अभिपत्य पूजिताम् ।
चरन् पुरीम् दश मुख बाहु पालिताम् ।अदृश्य ताम् जनक सुताम् सुपूजिताम् ।सुदुह्खिताम् पति गुण वेग निर्जिताम् ॥५-७-१६॥