वाल्मीकि रामायण 7.1
स वेश्म जालम् बलवान् ददर्श ।
व्यासक्त वैदूर्य सुवर्ण जालम् ।यथा महत् प्राव्Rषि मेघ जालम् ।विद्युत् पिनद्धम् सविहम्ग जालम् ॥५-७-१॥
स वेश्म जालम् बलवान् ददर्श ।
व्यासक्त वैदूर्य सुवर्ण जालम् ।यथा महत् प्राव्Rषि मेघ जालम् ।विद्युत् पिनद्धम् सविहम्ग जालम् ॥५-७-१॥