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वाल्मीकि रामायण 67.9

निरीक्षमाणः सहसा वायसं समवैक्षथाः ।
नखैः सरुधिरैस्तीक्ष्णैस्तामेवाभिमुखं स्थितम् ।। ५.६७.९ ।।।।

पूरा अध्याय