ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6767.34वाल्मीकि रामायण 67.34अश्रुपूर्णमुखी दीना बाष्पसन्दिग्धभाषिणी । ममोत्पतनसम्भ्रान्ता शोकवेगसमाहता ।। ५.६७.३४ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय