ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6666.8वाल्मीकि रामायण 66.8किमाह सीता वैदेही ब्रूहि सौम्य पुनः पुनः । पिपासुमिव तोयेन सिञ्चन्ति वाक्यवारिणा ।। ५.६६.८ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय