ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6565.25वाल्मीकि रामायण 65.25इति मामब्रवीत्सीता कृशाङ्गी धर्मचारिणी । रावणान्तःपुरे रुद्धा मृगीवोत्फुल्ललोचना ।। ५.६५.२५ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय