ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6565.20वाल्मीकि रामायण 65.20विज्ञाप्यश्च नरव्याघ्रो रामो वायुसुत त्वया । अखिलेनेह यद् दृष्टमिति मामाह जानकी ।। ५.६५.२० ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय