ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6565.10वाल्मीकि रामायण 65.10तत्र दृष्टा मया सीता रावणान्तःपुरे सती । संन्यस्य त्वयि जीवन्ती रामा राम मनोरथम् ।। ५.६५.१० ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय