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वाल्मीकि रामायण 64.3

स यथैवागतः पूर्वं तथैव त्वरितं गतः ।
निपत्य गगनाद्भूमौ तद्वनं प्रविवेश ह ।। ५.६४.३ ।।।।

पूरा अध्याय