ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6464.29वाल्मीकि रामायण 64.29कौसल्या सुप्रजा राम समाश्वसिहि सुव्रत । दृष्टा देवी न सन्देहो न चान्येन हनूमता ।। ५.६४.२९ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय