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वाल्मीकि रामायण 62.38

रामं च लक्ष्मणं चैव दृष्ट्वा सुग्रीवमेव च ।
समप्रतिष्ठां जगतीमाकाशान्निपपात ह ।। ५.६२.३८ ।।।।

पूरा अध्याय