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वाल्मीकि रामायण 62.35

वध्या ह्येते दुरात्मानो नृपाज्ञापरिभाविनः ।
अमर्षप्रभवो रोषः सफलो नो भविष्यति ।। ५.६२.३५ ।।।।

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