ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6262.23वाल्मीकि रामायण 62.23ते स्वामिवचनं वीरा हृदयेष्ववसज्य तत् । त्वरया ह्यभ्यधावन्त सालतालशिलायुधाः ।। ५.६२.२३ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय