ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 6161.3वाल्मीकि रामायण 61.3मेरुमन्दरसङ्काशा मत्ता इव महागजाः । छादयन्त इवाकाशं महाकाया महाबलाः ।। ५.६१.३ ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय