ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 66.10वाल्मीकि रामायण 6.10मुदित प्रमदा रत्नम् राक्षस इन्द्र निवेशनम् । वर आभरण निर्ह्रादैः समुद्र स्वन निह्स्वनम् ॥५-६-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय