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वाल्मीकि रामायण 59.4

न तदग्निशिखा कुर्यात् संस्पृष्टा पाणिना सती ।
जनकस्यात्मजा कुर्याद्यत् क्रोधकलुषीकृता ।। ५.५९.४ ।।।।

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