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वाल्मीकि रामायण 59.28

वृता चन्द्रलेखेव निष्प्रभा ।
अनुरक्ता हि वैदेही रामं सर्वात्मना शुभा ।अनन्यचित्ता रामे च पौलोमीव पुरन्दरे ।। ५.५९.२८ ।।।।

पूरा अध्याय